श्री सरस्वती चालीसा – Saraswati Chalisa (Hindi)
माँ सरस्वती ज्ञान, विद्या, बुद्धि, कला और वक्तृत्व की देवी हैं। Saraswati Chalisa के नियमित पाठ से ज्ञान, स्मरण शक्ति और सफलता प्राप्त होती है। नीचे संपूर्ण मूल सरस्वती चालीसा उपलब्ध है।

सूची (Table of Contents)
- सरस्वती चालीसा
- सरस्वती चालीसा के लाभ
- सरस्वती चालीसा पाठ विधि
- FAQs – सरस्वती चालीसा
- अन्य महत्वपूर्ण चालीसा
सरस्वती चालीसा
‘दोहा’
जनक जननि पद्मरज, निज मस्तक पर धरि।
बन्दौं मातु सरस्वती, बुद्धि बल दे दातारि॥
पूर्ण जगत में व्याप्त तव, महिमा अमित अनंतु।
दुष्जनों के पाप को, मातु तु ही अब हन्तु॥
सरस्वती चालीसा चौपाई
जय श्री सकल बुद्धि बलरासी।
जय सर्वज्ञ अमर अविनासी॥
जय जय जय वीणाकर धारी।
करती सदा सुहंस सवारी॥
रूप चतुर्भुजधारी माता।
सकल विश्व अंदर विख्याता॥
जग में पाप बुद्धि जब होती।
जबहि धर्म की फीकी ज्योती॥
तबहि मातु ले निज अवतारा।
पाप हीन करती महि तारा॥
वाल्मीकिजी थे हत्यारा।
तव प्रसाद जानै संसारा॥
रामायण जो रचे बनाई।
आदि कवी की पदवी पाई॥
कालिदास जो भये विख्याता।
तेरी कृपा दृष्टि से माता॥
तुलसी सूर आदि विद्धाना।
भये और जो ज्ञानी नाना॥
तिन्हहिं न और रहेउ अवलम्बा।
केवल कृपा आपकी अम्बा॥
करहु कृपा सोइ मातु भवानी।
दुखित दीन निज दासहि जानी॥
पुत्र करै अपराध बहुता।
तेहि न धरइ चित्त सुंदर माता॥
राखु लाज जननी अब मेरी।
विनय करूं बहु भांति घनेरी॥
मैं अनाथ तेरी अवलंबा।
कृपा करउ जय जय जगदंबा॥
मधु कैटभ जो अति बलवाना।
बाहुयुद्ध विष्णू ते ठाना॥
समर हजार पांच में घोरा।
फिर भी मुख उनसे नहिं मोरा॥
मातु सहाय भई तेहि काला।
बुद्धि विपरीत करी खलहाला॥
तेहि ते मृत्यु भई खल केरी।
पुरवहु मातु मनोरथ मेरी॥
चंड मुण्ड जो थे विख्याता।
छण महुं संहारेउ तेहि माता॥
रक्तबीज से समरथ पापी।
सुर-मुनि हृदय धरा सब कांपी॥
काटेउ सिर जिम कदली खम्बा।
बार बार बिनवउं जगदंबा॥
जग प्रसिद्ध जो शुंभ निशुंभा।
छिन में बधे ताहि तू अम्बा॥
भरत-मातु बुधि फेरेउ जाई।
रामचन्द्र बनवास कराई॥
एहि विधि रावन वध तुम कीन्हा।
सुर नर मुनि सब कहुं सुख दीन्हा॥
को समरथ तव यश गुन गाना।
निगम अनादि अनंत बखाना॥
विष्णु रूद्र अज सकहिं न मारी।
जिनकी हो तुम रक्षाकारी॥
रक्त दन्तिका और शताक्षी।
नाम अपार है दानव भक्षी॥
दुर्गम काज धरा पर कीन्हा।
दुर्गा नाम सकल जग लीन्हा॥
दुर्ग आदि हरनी तू माता।
कृपा करहु जब जब सुखदाता॥
नृप कोपित जो मारन चाहै।
कानन में घेरे मृग नाहै॥
सागर मध्य पोत के भंगे।
अति तूफान नहिं कोऊ संगे॥
भूत प्रेत बाधा या दुःख में।
हो दरिद्र अथवा संकट में॥
नाम जपे मंगल सब होई।
संशय इसमें करइ न कोई॥
पुत्रहीन जो आतुर भाई।
सबै छांड़ि पूजें एहि माई॥
करै पाठ नित यह चालीसा।
होय पुत्र सुन्दर गुण ईसा॥
धूपादिक नैवेद्य चढावै।
संकट रहित अवश्य हो जावै॥
भक्ति मातु की करै हमेशा।
निकट न आवै ताहि कलेशा॥
बंदी पाठ करें शत बारा।
बंदी पाश दूर हो सारा॥
मोहे जान अज्ञनी भवानी।
कीजै कृपा दास निज जानी॥
॥ दोहा ॥
माता सूरज कांति तव, अंधकार मम रूप।
डूबन ते रक्षा करहु, परूं न मैं भव-कूप॥
बल बुद्धि विद्या देहुं मोहि, सुनहु सरस्वति मातु।
मुझ अज्ञानी अधम को, आश्रय तू ही दे दातु॥
सरस्वती चालीसा के लाभ
- ज्ञान, बुद्धि और विद्या की प्राप्ति।
- स्मरण शक्ति और एकाग्रता बढ़ती है।
- छात्रों को परीक्षा में सफलता मिलती है।
- कला, संगीत और लेखन क्षमता बढ़ती है।
- नकारात्मकता और मानसिक भ्रम दूर होता है।
सरस्वती चालीसा पाठ विधि
- बुधवार, बसंत पंचमी या परीक्षा से पहले पढ़ना शुभ।
- सफेद वस्त्र पहनें और सफेद आसन पर बैठें।
- सफेद फूल और अक्षत अर्पित करें।
- वीणा या पुस्तक के सामने दीपक जलाएँ।
- शांत मन से चालीसा का पाठ करें।
FAQs – सरस्वती चालीसा
अन्य महत्वपूर्ण चालीसा
सरस्वती चालीसा का महत्व
सरस्वती चालीसा माँ सरस्वती की स्तुति का एक पवित्र स्तोत्र है, जिसका पाठ ज्ञान, विद्या, स्मरण शक्ति और मानसिक स्पष्टता प्राप्त करने के लिए किया जाता है। यह चालीसा छात्रों, शिक्षकों, लेखकों, संगीतकारों और कला साधकों के लिए विशेष रूप से लाभकारी मानी जाती है।
बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा के दिन सरस्वती चालीसा का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि इस समय माँ सरस्वती की कृपा शीघ्र प्राप्त होती है।
सरस्वती चालीसा कब और कितनी बार पढ़नी चाहिए?
- बसंत पंचमी के दिन प्रातःकाल पाठ करना सबसे शुभ माना जाता है।
- परीक्षा, अध्ययन या नए शैक्षणिक कार्य से पहले पाठ करें।
- बुधवार के दिन माँ सरस्वती की पूजा के साथ चालीसा पढ़ सकते हैं।
- नियमित साधना के लिए प्रतिदिन या सप्ताह में एक बार पाठ करें।
- विशेष मनोकामना हेतु 1, 5 या 11 बार पाठ लाभकारी माना जाता है।
सरस्वती चालीसा से जुड़े लाभ किसे मिलते हैं?
सरस्वती चालीसा का पाठ विद्यार्थियों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं, लेखकों, कवियों, संगीतकारों और कलाकारों के लिए विशेष रूप से लाभदायक माना जाता है।
यह चालीसा मानसिक तनाव कम करती है, एकाग्रता बढ़ाती है और रचनात्मक क्षमता को मजबूत करने में सहायक होती है।
सरस्वती पूजा और बसंत ऋतु के धार्मिक महत्व को विस्तार से जानने के लिए हमारी वसंत पंचमी 2026 गाइड अवश्य पढ़ें।
