Aarti Collection
आरती क्या है ( What is Aarti ?)

आरती हिन्दू धर्म में ईश्वर की उपासना की एक पवित्र और महत्वपूर्ण विधि है। पूजा के अंत में जलती हुई ज्योति के माध्यम से भगवान के प्रति श्रद्धा, समर्पण और कृतज्ञता व्यक्त की जाती है। आरती भक्त और भगवान के बीच आध्यात्मिक संबंध को सुदृढ़ करती है।
आरती क्या होता है?
आरती हिन्दू उपासना की एक विशेष विधि है, जिसमें घी, तेल या कपूर से प्रज्वलित दीपक को इष्ट देव के समक्ष एक निश्चित विधि से घुमाया जाता है। इसके साथ धूप, अगरबत्ती और सुगंधित पदार्थों का प्रयोग कर वातावरण को पवित्र बनाया जाता है।
मंदिरों में प्रातः, सायंकाल और रात्रि (शयन आरती) की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। तमिल भाषा में आरती को दीप आराधनई कहा जाता है।
आरती का धार्मिक महत्व
सामान्यतः पूजा के अंत में भगवान की आरती की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, केवल आरती करने से ही नहीं बल्कि उसमें सम्मिलित होने मात्र से भी पुण्य की प्राप्ति होती है। आरती के समय भगवान को तीन बार पुष्प अर्पित करना श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक माना जाता है।
आरती विधान
आरती करते समय भक्त के मन में यह भावना होनी चाहिए कि वह अपने पंच-प्राणों के माध्यम से ईश्वर की आराधना कर रहा है। घी की ज्योति को आत्मा की ज्योति का प्रतीक माना जाता है।
आरती प्रायः दिन में एक से पाँच बार की जाती है। विषम संख्या (3, 5 या 7) की बत्तियों से की गई आरती शुभ मानी जाती है। पाँच बत्तियों वाली आरती को पंच प्रदीप आरती कहा जाता है।
सामान्यतः विषम संख्या (3, 5 या 7) की बत्तियों से आरती की जाती है। पाँच बत्तियों वाली आरती को पंच प्रदीप आरती कहा जाता है।
आरती के प्रकार
- दीपमाला द्वारा आरती
- जल से भरे शंख द्वारा आरती
- स्वच्छ वस्त्र द्वारा आरती
- आम एवं पीपल के पत्तों द्वारा आरती
- साष्टांग आरती (शरीर के पाँच अंगों से)
आरती कैसे करें?
आरती करते समय दीपक या थाली को इष्ट देव की मूर्ति के समक्ष ऊपर से नीचे और गोलाकार घुमाया जाता है। इसके साथ सामूहिक रूप से आरती गान किया जाता है।
आरती के बाद दीपक को भक्तों के बीच घुमाया जाता है और भक्त अपने मस्तक से ज्योति का स्पर्श करते हैं। यह ईश्वर की कृपा और सकारात्मक ऊर्जा ग्रहण करने का प्रतीक है।
पूजा की थाली और उसका महत्व
आरती की थाली प्रायः पीतल, तांबा, चाँदी या सोने की बनी होती है। इसमें दीपक, फूल, धूप और अगरबत्ती रखी जाती है। विशेष अवसरों पर 108 या अधिक दीपकों से आरती की जाती है, जिन्हें शत दीपक या सहस्र दीप कहा जाता है।
पूजा सामग्री का आध्यात्मिक महत्व
- कलश: सभी देवताओं का वास
- जल: शुद्धता और पवित्रता का प्रतीक
- नारियल: सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत
- स्वर्ण: सात्विक ऊर्जा का संचार
- तांबा: सात्विक गुणों की वृद्धि
- तुलसी: वातावरण शुद्ध करने वाली वनस्पति
